Saturday, June 1, 2013

सफ़र

जिन्दगी क्या वाकई एक सफ़र है ??? अब कुछ कुछ लगता ऐसा ही है...  अभी कल की ही तो बात है, एक सफर खत्म हुआ.. लगता है जान आ गयी जीवन में.. पर अरे ये क्या फिर खर कमंडल उठा के चलने कि तैयारी शुरू कर दी... अरे रुको कुछ तो सांस लेलो देखों कितने दूर निकल आए हो !! अंदर से आवाज़ आई...  जीवन की कर्म भूमि पे फल के लिए "श्रम" सबको करना पड़ता है... हाथों में सिर्फ लकीरे खुदा देता है "रंग" तो हमको ही भरना पड़ता है !!! रुको नहीं ... सफ़र पे चलते चलो !!!  

4 comments:

  1. hatho me likire khuda deta haibharna humko padta hai thoughful . batwara wala hearttouching ,khuda ki jo manjur

    ReplyDelete
    Replies
    1. कहाँ हो आप कुछ भी नहीं पता चल रहा है !!!

      Delete
  2. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  3. जिंदगी एक सफ़र ही है चचा ...चलते रहो चलना ही ज़िन्दगी है ,..:)

    ReplyDelete